अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आकस्मिकता योजना नियम-1995

    उद्देश्य-

पीड़ित अनुसूचित जाति#अनुसूचित जनजाति के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना।

    योजना का स्वरूप कार्यक्षेत्र एवं पुनर्वास सुविधा-

पीड़ित, विपन्नता तथा असहाय अवस्था के कारण संकट से ग्रस्त अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को इस कार्यक्रम के माध्यम से निम्नानुसार त्वरित सहायता पहुंचाई जाती है।

    राहत राशि के लिए मापदण्ड-

1. अखाद्य या घृणाजनक पदार्थ या खाना (धारा 3 (1))
प्रत्येक पीड़ित को अपराध के स्वरूप गंभीरता को देखते हुए 25,000#- या उससे अधिक और पीड़ित व्यक्ति द्वारा अनादर, अपमान, क्षति तथा मानहानि सहने के अनुपात में भी होगा।

2. क्षति पहुंचना, अपमानित करना या क्षुब्ध करना (धारा-3 (1) )
दिये जाने वाला भुगतान निम्नलिखित होगा :-
1. 25 प्रतिशत जब आरोप-पत्र न्यायालय को भेजा जाए।
2. 75 प्रतिशत तब जब निचले न्यायालयों द्वारा दोषसिध्द ठहराया जाए।

3. अनादरसूचक कार्य (धारा-3 (1)—-तदैव—

4. सदोष भूमि अधिभोग में लेना या उस पर कृषि करना आदि (धारा-3 (1))

अपराध के स्वरूप और गंभीरता को देखते हुए कम से कम 25000#- रुपये या उससे अधिक भूमि#परिसर#जल की आपूर्ति जहां आवश्यक हो, सरकारी खर्च पर पुन: वापस की जाएगी जब आरोप-पत्र न्यायलय को भेजा जाए, पूरा भुगतान किया जाए।

5. भूमि, परिसर या जल से संबंधित (धारा-3 (1))—तदैव—–

6.बेगार या बलात्श्रम या बंधुआ मजदूरी (धारा-3 (1)
प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को कम से कम 25,000#- रुपये प्रथम सूचना रिपोर्ट की स्टेज पर 25 प्रतिशत और 75 प्रतिशत निचले न्यायालय में दोषसिध्द होने पर।

7.मतदान के अधिकार के संबंध में (धारा-3) (1))

प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को 20,000#- रुपये जो अपराध के स्वरूप और गंभीरता पर निर्भर है।

8.मिथ्या, द्वेषपूर्ण या तंग करने वाली विधिक कार्यवाही (धारा-3 (1)

25,000#- रुपये या वास्तविक विधिक व्यय और क्षति की प्रतिपूर्ति या अभियुक्त के विचारण की समाप्ति के बाद, जो भी कम हो।

9.मिथ्या या तुच्छ जानकारी (धारा-3) (1))

10.अपमान, अभित्रास (धारा-3 (1))

अपराध के स्वरूप पर निर्भर करते हुये प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को 25,000 रुपये तक 25 प्रतिशत उस समय जब आरोप-पत्र न्यायालय को भेजा जाये और शेष दोष सिध्द होने पर।

11.किसी महिला की लज्जा भंग करना (धारा-3 (1))

अपराध के प्रत्येक पीड़ित को 50,000 रु. चिकित्सा जांच के पश्चात 50 प्रतिशत का भुगतान किया जाये और शेष 50 प्रतिशत का विचारण की समाप्ति पर भुगतान किया जाये।

12.महिला का लैंगिक शोषण (धारा-3 (1))—-तदैव—-

13.पानी गंदा करना (धारा-3 (1))

1,00,000 रु. तक जब पानी को गंदा कर दिया जाये तो उसे साफ करने सहित या सामान्य सुविधा को पुन: बहाल करने की पूरी लागत। उस स्तर पर जिस पर जिला प्रशासन द्वारा ठीक समझा जाये, भुगतान किया जाये।

14.मार्ग में रूढ़िजन्य अधिकार से वंचित करना। (धारा-3 (1))

1,00,000 रुपये तक या मार्ग के अधिकार को पुन: बहाल करने की पूरी लागत और जो नुकसान हुआ है, यदि कोई हो उसका पूरा प्रतिकर 50 प्रतिशत जब आरोप पत्र न्यायालय को भेजा जाये और 50 प्रतिशत निचले न्यायालय को दोष सिध्द होने पर।

15.किसी को निवास स्थान छोड़ने पर मजबूर करना (धारा-3 (1))

स्थल बहाल करना। ठहराने का अधिकार और प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को 25,000 रु. का प्रतिकर तथा सरकार के खर्च पर मकान का पुनर्निर्माण यदि नष्ट किया गया हो पूरी लागत का भुगतान जब निचले न्यायालय में आरोप पत्र भेजा जाये।

16.मिथ्या साक्ष्य देना (धारा-3 (1))

कम से कम 1,00.000 रुपये या उठाये गये नुकसान या हानि का पूरा प्रतिकार। 50 प्रतिशत का भुगतान जब आरोप पत्र न्यायालय में भेजा जाये और 50 प्रतिशत निचले न्यायालय द्वारा दोष सिध्द होने पर।

17.भारतीय दण्ड संहिता के अधिनियम के तहत 10 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय अपराध करना। (धारा-3 (1)

अपराध के स्वरूप और गंभीरता को देखते हुये प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को या उसके आश्रित को कम से कम 50,000 रुपये यदि अनुसूचि में विशिष्ट रूप है, अन्यथा प्रावधान किया हुआ हो, तो राशि में अंतर होगा।

18.किसी लोक सेवा के हाथों उत्पादन (धारा-3 (1)

उठाई गई हानि या नुकसान का पूरा प्रतिकर। 50 प्रतिशत का भुगतान जब आरोप पत्र न्यायालय में भेजा जाये और 50 प्रतिशत का भुगतान जब निचले न्यायालय में दोषसिध्द हो जाये, किया जायेगा।

19.निर्योग्यता। कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की समय- समय पर यहां संशोधित अधिसूचना सं. 4.2.83 एच.डब्ल्यू. 3, तारीख 6 अगस्त 1986 में शारीरिक और मानसिक निर्योग्ताओं का उल्लेख किया गया है। अधिसूचना का एक प्रति अनुबंध-2 पर है।

(क) 100 प्रतिशत असमर्थता
1. परिवार का न कमाने वाला सदस्य
2. परिवार का कमाने वाला सदस्य

अपराध के प्रत्येक पीड़ित को कम से कम 1,00,000 रुपये। 25 प्रतिशत प्रथम सूचना रिपोर्ट और 25 प्रतिशत आरोप पत्र पर और 25 प्रतिशत निचले न्यायालय द्वारा दोषसिध्द होने पर। अपराध के प्रत्येक पीड़ित को कम से कम 2,00,000 रुपये। 50 प्रतिशत प्रथम सूचना रिपोर्ट#चिकित्सा जांच पर भुगतान किया जाये और 25 प्रतिशत आरोप पत्र पर और 25 प्रतिशत निचले न्यायालय द्वारा दोषसिध्द होने पर।

(ख) जहां असमर्थता 100 प्रतिशत से कम है।

उपर्युक्त क-1 और 2 में निर्धारित दरों पर उसी अनुपात में कम किया जायेगा। भुगतान के चरण भी वही रहेगें। तथापि न कमाने वाले सदस्य को 15,000 रु. से कम नहीं और परिवार के कमाने वाले सदस्य को 30,000 रु. से कम नहीं होगा।

20.हत्या#मृत्यु
1. परिवार का न कमाने वाला सदस्य
2. परिवार का कमाने वाला सदस्य

प्रत्येक मामले में कम से कम 1,00,000 रुपये। 75 प्रतिशत पोस्ट मार्टम के पश्चात और 25 प्रतिशत निचले न्यायालय द्वारा दोषसिध्द होने पर। प्रत्येक मामले में कम से कम 2,00,000 रुपये। 75 प्रतिशत का भुगतान पोस्टमार्टम के पश्चात और 25 प्रतिशत निचले न्यायालय द्वारा दोषसिध्द होने पर।

21.हत्या, मृत्यु, नरसंहार, बलात्संग, सामूहिक बलात्संग, गैंग द्वारा किया गया बलात्संग, स्थायी असमर्थता और डकैती।

उपर्युक्त मदों के अंतर्गत भुगतान की गई राहत की रकम के अतिरिक्त राहत की व्यवस्था अत्याचार की तारीख से तीन मास के भीतर निम्नलिखित रूप से की जाये।
1. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मृतक की प्रत्येक विधवा या अन्य आश्रितों को 1000 रु. प्रतिमास की दर से या मृतक के परिवार के एक सदस्य को रोजगार या कृषि भूमि, एक मकान यदि आवश्यक हो, तो तत्काल खरीद द्वारा।
2. पीड़ितों के बच्चों की शिक्षा और उनके भरण-पोषण का पूरा खर्चा। बच्चों को आश्रम, स्कूलों#आवासीय स्कूलों में दाखिल किया जाये।
3. तीन मास की अवधि तक बर्तनों, चावल, गेंहू, दालों, दलहनों आदि की व्यवस्था।

22.पूर्णतया नष्ट करना#जला हुआ मकान

जहां मकान को जला दिया गया हो या नष्ट कर दिया गया हो, जहां सरकारी खर्च पर ईंट#पत्थर के मकान का निर्माण किया जाये या उसकी व्यवस्था की जाये। योजना का कार्यक्षेत्र संपूर्ण मध्यप्रदेश है।

    पात्रता-

अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के सभी पीड़ित व्यक्ति जो कि सामान्य वर्ग द्वारा किये गये अत्याचार से पीड़ित हों।

    संपर्क-

आवेदन पत्र जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अनुसूचित जाति कल्याण थाने, सहायक आयुक्त अथवा जिला संयोजक को प्रस्तुत करना चाहिये।
पात्रता- अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के सभी पीड़ित व्यक्ति जो कि सामान्य वर्ग द्वारा किये गये अत्याचार से पीड़ित हों।

    संपर्क-

आवेदन पत्र जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, अनुसूचित जाति कल्याण थाने, सहायक आयुक्त अथवा जिला संयोजक को प्रस्तुत करना चाहिये।